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पाकिस्तानी नागरिक के साथ मिलकर फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला गिरोह एक और सदस्य बेनकाब, ED ने आरोपी
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पाकिस्तानी नागरिक के साथ मिलकर फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला गिरोह एक और सदस्य बेनकाब, ED ने आरोपी

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कोलकाता जोनल ऑफिस की टीम ने सोमवार (13 अक्टूबर, 2025) को इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल को गिरफ्तार किया है. ये कार्रवाई उस केस से जुड़ी है, जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक आजद हुसैन उर्फ अजाद मलिक उर्फ अहमद हुसैन आजाद भारत में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था. गिरफ्तार आरोपी को कोलकाता की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 5 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया गया है.

बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों के लिए तैयार करता था फर्जी दस्तावेज

ईडी की जांच के मुताबिक, आजाद हुसैन असल में पाकिस्तान का नागरिक है, लेकिन वो भारत में अजाद मलिक नाम से रह रहा था. उसने भारत में रहते हुए फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाए और बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों के लिए भी फर्जी पहचान दस्तावेज और पासपोर्ट बनवाने का रैकेट चला रखा था. इसके बदले में वह उनसे मोटी रकम वसूलता था. पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने ये मामला दर्ज किया था. जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की.

ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

ED की जांच में खुलासा हुआ कि आजाद हुसैन ने कई बांग्लादेशी नागरिकों को इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल से मिलवाया था. दुलाल पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के चकदह का रहने वाला है और पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया सेट कर रखी थी. वो इन बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर भारतीय पासपोर्ट दिलवाता था. अब तक की जांच में सामने आया है कि करीब 250 मामलों में दुलाल की भूमिका सामने आई है.

दुलाल की पहले एंटीसिपेटरी बेल लोकल कोर्ट में और बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में भी खारिज हो चुकी है. इस केस का मुख्य आरोपी आजाद हुसैन उर्फ अजाद मलिक को पहले ही 15 अप्रैल, 2025 को गिरफ्तार किया जा चुका है और वो इस वक्त न्यायिक हिरासत में है.

मामले में एजेंसी को सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत का शक

ईडी ने उसके खिलाफ 13 जून, 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत चार्जशीट दायर की थी. जिस पर 19 जून, 2025 को अदालत ने संज्ञान लिया था. ईडी की टीम अब इस रैकेट से जुड़े दूसरे लोगों की भी जांच कर रही है. एजेंसी को शक है कि ये नेटवर्क सीमावर्ती इलाकों में फैला हुआ है और कई सरकारी कर्मचारियों की भी इसमें मिलीभगत हो सकती है.

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