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मुंबई नेवी बेस से चोरी हुई INSAS रायफल और 40 जिंदा कारतूस मामले में बड़ा खुलासा, तेलंगाना क्राइ
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मुंबई नेवी बेस से चोरी हुई INSAS रायफल और 40 जिंदा कारतूस मामले में बड़ा खुलासा, तेलंगाना क्राइ

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मुंबई नेवी बेस से चोरी हुई INSAS रायफल और 40 जिंदा कारतूसों की जांच में एक अहम खुलासा हुआ है. क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार मुख्य आरोपियों में से एक अग्निवीर (नेवी सिपाही) राकेश दुबुल्ला का बड़ा भाई और मामले का दूसरा आरोपी उमेश दुबुल्ला तीन पूर्व नक्सलियों से सीधे संपर्क में थे. ये तीनों पूर्व नक्सली पहले सरेंडर कर चुके थे पर जांच में मिल रही सूचनाओं से स्पष्ट हुआ है कि वे गुप्त रूप से नक्सली समूहों से संपर्क बनाए हुए हैं और उनके लिए काम कर रहे थे.

सूत्रों के मुताबिक उमेश दुबुल्ला ने तेलंगाना स्थित नक्सली समूह में शामिल होने की योजना बनाई थी और यह योजना राकेश के साथ मिलकर नेवी की उन्नत रायफल व कारतूस चोरी करके पूरी करने की थी. मोबाइल फ़ोन से मिले सुरागों में उमेश और इन पूर्व नक्सलियों के बीच की लगातार बातचीत के प्रमाण मिले हैं. इन्हीं सुरागों के आधार पर मुंबई क्राइम ब्रांच की टीमें फिलहाल तेलंगाना में पहुंचकर सबूतों और संदिग्ध संपर्कों की तहकीकात कर रही हैं.

दलम कमांडर बनना था उमेश का मकसद 
क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताते हैं कि आरोपी उमेश का मकसद दलम कमांडर बनना था और नक्सली संरचनाओं में उच्च पद तक पहुंचने के लिए बड़े हथियार की आवश्यकता मानी जाती है. गिरफ्तारी एल्गापल्ली इलाके से हुई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आता है. इसलिए उमेश का नक्सल समूहों से जुड़ाव और स्थानीय समर्थन उसके लिए सहायक रहा. जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि उमेश के पास स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी कुछ पकड़ थी, जिससे गुप्त जानकारियां उसे मिलती रही होंगी.

क्राइम ब्रांच को क्या-क्या पता चला
क्राइम ब्रांच तेलंगाना में जुटाई जा रही फॉरेंसिक, कॉल-डेटा और गवाहियों को संयोजित कर मजबूत चार्जशीट तैयार करने में लगा है. अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि मामले की गम्भीरता को देखते हुए आगे और गिरफ्तारियां तथा क्षेत्रीय रेड की संभावनाएं हैं. एक अधिकारी ने बताया कि नक्सल दलम कमांडर पद के लिए आमतौर पर INSAS, AK-47 या SLR स्तर के हथियार की जरूरत होती है. पद पर नियुक्ति अनुभव और साहस के आधार पर होती है. वहीं नक्सल दलम मेंबर बनने के लिए आमतौर पर थ्री नॉट थ्री, बोर पिस्टल या 12-बोर जैसे छोटे हथियार व नक्सली ट्रेनिंग अनिवार्य मानी जाती है.

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