सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक करवाने का आदेश दिया है. चुनाव टालने के राज्य चुनाव आयोग के अनुरोध को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने कहा है कि इसके बाद वह तारीख आगे बढ़ाने पर विचार नहीं करेगा.
ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद के चलते 2022 से ही बृहन्नमुम्बई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) समेत कई शहरी निकायों के चुनाव टलते जा रहे थे. इस साल 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विराम लगाते हुए साफ किया था कि आरक्षण उसी व्यवस्था से दिया जाएगा जो 2022 से पहले लागू थी.
सुप्रीम कोर्ट के चुनाव आयोग को दिया था निर्देश
इस साल 6 मई को दिए आदेश में जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य चुनाव आयोग से 4 सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी करने को कहा था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि आयोग 4 महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करे. मंगलवार (16 सितंबर, 2025) को हुई सुनवाई में जजों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि चुनाव की अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है.
कोर्ट के निर्देश पर राज्य चुनाव आयोग ने क्या दी दलील?
इस पर महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट से कुछ और समय देने का अनुरोध किया. उन्होंने बताया सीटों के परिसीमन में कुछ समय लग रहा है. इसके अलावा आयोग पहली बार 29 नगरपालिकाओं समेत सभी निकायों के चुनाव एक साथ करवाने जा रहा है. इसके लिए 50 हज़ार अतिरिक्त EVM की ज़रूरत है. इसका ऑर्डर संबंधित कंपनी को दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की दलील को किया स्वीकार
कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि वह आयोग को अंतिम अवसर दे रहा है. सीटों का परिसीमन 31 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाए. अतिरिक्त EVM की व्यवस्था भी 31 अक्टूबर तक कर ली जाए. इसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हो. जिला परिषद, पंचायत समिति और नगरपालिका समेत सभी निकायों के चुनाव एक साथ करवाए जाएं. पूरी प्रक्रिया को 31 जनवरी तक पूरा कर लिया जाए. फरवरी में मामले की अगली सुनवाई होगी.
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