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ब्रिक्स सम्मेलन में ट्रंप का नाम लिए बिना जयशंकर ने कही ऐसी बात, अमेरिकी राष्ट्रपति को लग जाएगी
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ब्रिक्स सम्मेलन में ट्रंप का नाम लिए बिना जयशंकर ने कही ऐसी बात, अमेरिकी राष्ट्रपति को लग जाएगी

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को BRICS सम्मेलन में कहा कि वैश्विक व्यवस्था में आर्थिक नीतियां निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये नीतियां सभी देशों के विकास और लाभ के लिए होनी चाहिए, जिससे समानता बनी रहे.

निष्पक्ष और पारदर्शी आर्थिक नीतियां जरूरी
जयशंकर ने वर्चुअल BRICS बैठक में कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक व्यवहारों का उद्देश्य केवल कुछ देशों का लाभ नहीं, बल्कि सभी के लिए स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित करना होना चाहिए. ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का तरीका खुला, निष्पक्ष, साफ-सुथरा और बिना भेदभाव वाला होना चाहिए. इन नियमों की हमेशा रक्षा की जानी चाहिए.

सहयोगात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएं
उन्होंने सभी देशों से मिलकर “रचनात्मक और सहयोगात्मक” दृष्टिकोण अपनाने की अपील की. जयशंकर ने बताया कि वर्तमान समय में वैश्विक व्यापार को सतत और टिकाऊ बनाना जरूरी है ताकि विश्व की अर्थव्यवस्था स्थिर रूप से आगे बढ़ सके. जयशंकर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार में बाधाएं बढ़ाने और जटिल लेन-देन से कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने BRICS देशों से आग्रह किया कि वे व्यापार प्रवाह की समीक्षा करके उदाहरण पेश करें. उनका कहना था कि ज्यादा बाधाएं केवल व्यापार को नुकसान पहुंचाएंगी. उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य होने चाहिए अधिक लचीली, भरोसेमंद, वैकल्पिक और छोटे सप्लाई चैन बनाना ताकि किसी भी झटके से निपटा जा सके.”

व्यापार घाटा और समाधान की जरूरत
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत के सबसे बड़े व्यापार घाटे BRICS देशों के साथ हैं. उन्होंने कहा कि भारत समयबद्ध समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आज की बैठक में इस विषय पर महत्वपूर्ण समझ बन जाएगी. उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली का आधार खुलापन, निष्पक्षता, समावेशिता, समानता और नियम आधारित दृष्टिकोण पर टिका है, जिसमें विकासशील देशों के लिए विशेष व भेदभावरहित प्रावधान शामिल हैं.”



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