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US Tariffs: ट्रंप लगा रहे टैरिफ, भारत कर रहा नई डील की बात, आखिर चल क्या रहा है?
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US Tariffs: ट्रंप लगा रहे टैरिफ, भारत कर रहा नई डील की बात, आखिर चल क्या रहा है?

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एक तरफ तो अमेरिका भारत के खिलाफ टैरिफ पर टैरिफ लगाए जा रहा है, भारत के खिलाफ उल्टी-सीधी बयानबाजी कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत फिर से अमेरिका के साथ डील साइन करने की बात कर रहा है, उम्मीद कर रहा है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा और कह रहा है कि नवंबर तक अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय सौदा हो जाएगा. ये बयान भी किसी अधिकारी का नहीं बल्कि देश के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का है, जो कह रहे हैं कि ऑल इज वेल होगा.

एनुअल ग्लोबल इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि चीजें जल्दी बेहतर होंगी और हम नवंबर तक अमेरिका के साथ वो द्विपक्षीय समझौता कर लेंगे जिसकी बात हमारे दो अधिकारियों ने फरवरी 2025 में की थी. लेकिन सवाल है कि कैसे क्योंकि पीयूष गोयल का ये बयान ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें ट्रंप ने सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर लिखा था कि भारत ने अपना टैरिफ जीरो करने का ऑफर दिया है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है.

ट्रंप ने भारत के साथ अपने कारोबारी रिश्ते को इकतरफा रिश्ता भी बताया था और ऐसे में जब अमेरिका की ओर से सारे दरवाजे बंद करने की बात की जा रही है तो फिर पीयूष गोयल की उम्मीद की वजह क्या है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा.

बाकी तो ट्रंप अब उन दवाओं पर भी टैरिफ लगाने की बात करने लगे हैं, जिन्हें अब तक छूट मिली हुई है. ये टैरिफ तो भारत पर लगाए गए टैरिफ का चारगुना तक होने की बात आ रही है. यानी कि ट्रंप टैरिफ से अभी तक बेअसर फार्मा कंपनियों को अब सबसे बड़ा नुकसान सहना पड़ सकता है, क्योंकि उनपर टैरिफ की दर 200 फीसदी तक हो सकती है.

बाकी रही-सही कसर तो एससीओ समिट ने पूरी कर ही दी है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से हुई मुलाकात ने ट्रंप को इतना चिढ़ा दिया है कि अब ट्रंप को सब दुश्मन ही दुश्मन नजर आने लगे हैं. ट्रंप के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो अलग ही राग अलाप रहे हैं.

ये सब तब हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच 25 अगस्त को द्विपक्षीय बातचीत होने वाली थी, जो नहीं हुई और न ही इस बातचीत के लिए अलग से किसी तारीख का ऐलान ही हुआ है. इसके बावजूद अगर पीयूष गोयल सबकुछ ठीक होने की उम्मीद जता रहे हैं तो हमें भी उम्मीद करनी होगी कि सब ठीक ही होगा. अगर सब ठीक नहीं हुआ तो कितनी नौकरियां जाएंगी, कितनी फैक्ट्रियां बंद होंगी और कितने हजार करोड़ का नुकसान होगा, इसको सोचने भर से ही सिहरन होने लगती है.



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