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जब पाकिस्तान की हरकत पर भड़क गए अजीत डोभाल, बीच में ही छोड़ी SCO बैठक, रूस भी खुलकर आया था भारत
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जब पाकिस्तान की हरकत पर भड़क गए अजीत डोभाल, बीच में ही छोड़ी SCO बैठक, रूस भी खुलकर आया था भारत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को चीन पहुंचे. उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत चीन के साथ आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. पीएम मोदी का यह यात्रा उस समय की याद दिलाती है जब पांच साल पहले भारत के सुपर स्पाई और एनएसए अजीत डोभाल ने देश की संप्रभुता पर कड़ा रुख अपनाया था.

पाकिस्तान के मैप देख भड़क गए अजीत डोभाल

कोविड-19 महामारी के दौर में साल 2020 में जब सब कुछ ऑनलाइन हो चुकी थी तब शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वर्चुअल बैठक कर रहे थे. इस दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉ. मोईद यूसुफ ने एक नया राजनीतिक मैप दिखाया, जिसमें जम्मू कश्मीर और जूनागढ़ को पाकिस्तान का अंग बताया गया था. यह एससीओ के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था क्योंकि यहां द्विपक्षीय विवादों को नहीं ला सकते हैं.

SCO बैठक छोड़कर निकल गए अजीत डोभाल

भारत ने तुरंत इस पर आपत्ति जताई. इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे रूस ने बार-बार पाकिस्तान को नक्शा हटाने के लिए कहा, लेकिन उसने किसी भी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया. उसी समय भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उठकर एससीओ समिट से बाहर चले गए. यह उस बैठक में मौजूद सभी देशों के लिए संदेश था कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगने देगा.

भारत के सपोर्ट में खुलकर उतरा रूस

पाकिस्तान की इस हरकत के बाद रूस खुलकर भारत के सपोर्ट में उतर गया. रूस ने साफ किया कि वह पाकिस्तान की उकसावे वाली कार्रवाई का समर्थन नहीं करता है. रूसी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पात्रुशेव ने अजीत डोभाल की बैठक से बाहर निकलने की तारीफ की थी.

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल का ट्रैक रिकॉर्ड जासूसी थ्रिलर जैसा है. उन्होंने अपने जीवन का एक लंबा समय पाकिस्तान में अडर कवर एजेंट के रूप में काम कर गुजारा है. 1971 से 1978 के बीच उन्होंने पाकिस्तान में रहकर उसके कई योजनाओं पर पानी फेरा है. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने एक मौलवी के वेश में कई जरूरी जानकारी इकट्ठा की, जिससे भारत को रणनीतिक निर्णय लेने में मदद मिली.

ये भी पढ़ें : ‘भारत-चीन प्रतिद्वंदी नहीं, एक-दूसरे के साझेदार’, शी जिनपिंग-पीएम मोदी की बैठक से ट्रंप को बड़ा संदेश



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