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मैसूर दशहरा पर बवाल! सरकार ने बानू मुश्ताक को दिया न्योता तो भड़की बीजेपी, मुस्लिम लेखिका का आय
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मैसूर दशहरा पर बवाल! सरकार ने बानू मुश्ताक को दिया न्योता तो भड़की बीजेपी, मुस्लिम लेखिका का आय

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विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा-2025 समारोह का उद्घाटन करने के लिए कर्नाटक सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता और मुस्लिम लेखिका बानू मुश्ताक को न्योता दिया था, जिसको लेकर बवाल मचा हुआ है. बीजेपी ने पूछा था कि क्या बानू मुश्ताक को देवी चामुंडेश्वरी में विश्वास है. वहीं अब इस पूरे मामले पर लेखिका का पहला रिएक्शन आया है. 

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र और मैसुरु से सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार सहित कई भाजपा नेताओं ने सोमवार (25 अगस्त, 2025) को कहा था कि बानू को दशहरा का उद्घाटन करने की सहमति देने से पहले देवी चामुंडेश्वरी के प्रति अपनी श्रद्धा स्पष्ट करनी चाहिए.

यह विवाद एक पुराने वीडियो से उपजा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कन्नड़ भाषा को ‘देवी भुवनेश्वरी’ के रूप में पूजने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि उनके (अल्पसंख्यकों) जैसे लोग इसके दायरे में नहीं आते.

पारंपरिक रूप से चामुंडेश्वरी देवी की होती है पूजा

दशहरे के पर्व का शुभारंभ पारंपरिक रूप से मैसुरु में चामुंडी पहाड़ियों के ऊपर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मैसूरु और उसके राजघरानों की अधिष्ठात्री देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति की पूजा और उस पर पुष्प वर्षा करके किया जाता है.

समारोह को लेकर बानू ने क्या कहा था?

बानू ने सोमवार (25 अगस्त, 2025) को बेंगलुरु के संगठन ‘अम्माना मदिलु’ से बगीना (पारंपरिक भेंट) प्राप्त करने के बाद कहा, “यह (दशहरा के उद्घाटन का निमंत्रण) निश्चित रूप से एक खुशी की बात है. हम इसे विभिन्न तरीकों से देख सकते हैं. आप चामुंडेश्वरी ताई (मां चामुंडेश्वरी) कहते हैं, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करती हूं. कई लोग इसे नाडा हब्बा (राज्य उत्सव) कहते हैं, मैं उसका भी सम्मान करती हूं.”

उन्होंने कहा, “दशहरे को नाडा हब्बा कहना या देवी चामुंडेश्वरी को बड़े प्यार और स्नेह से ताई (मां) कहना. ये सब हमारी संस्कृति और इस राज्य का हिस्सा हैं. इसलिए यह त्योहार मुझे भी पसंद है और मैं इसका सम्मान करती हूं और मैं इसमें स्नेह से भाग लेती हूं.”

बचपन में मैं जंबो सवारी देखने गई थी- बानू

बानू ने कहा, “बचपन में मैं अपने माता-पिता के साथ दशहरे में ‘जंबो सवारी’ (विजयदशमी के जुलूस में लगभग एक दर्जन सजे-धजे हाथियों की यात्रा) देखने गई थी. इस बार मुझे दशहरे के उद्घाटन का निमंत्रण मिला है और यह मेरे लिए बेहद खुशी की बात है.”

दरअसल, राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक ‘मैसुरु दशहरा 2025’ समारोह का उद्घाटन करेंगी.

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