INS Taragiri: भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत करने में जुटा है और इसी कड़ी में आज देश को एक और बड़ी कामयाबी मिलने जा रही है. स्वदेशी रूप से बना एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी (F41) आज समंदर में उतरेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसके शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे. इस युद्धपोत के जरिए भारत दुनिया को अपनी बढ़ती नौसैनिक ताकत का साफ संदेश देने जा रहा है.
मुद्री आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा तारागिरी
‘INS तारागिरी’ एक स्वदेशी युद्धपोत है, जिसे प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाया गया है. यह इस प्रोजेक्ट का चौथा फ्रिगेट है और मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया तीसरा जहाज है. इस युद्धपोत को 28 नवंबर को नौसेना को आधिकारिक तौर पर सौंपा गया था. इसमें 75% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम है.
क्या है इस युद्धपोत की खासियत?
INS तारागिरी को अत्याधुनिक तकनीक और घातक हथियारों से लैस किया गया है. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, MF-STAR रडार और MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम लगाया गया है. इसके अलावा इसमें 30mm और 12.7mm क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी मौजूद हैं. पनडुब्बी रोधी (ASW) ऑपरेशन के लिए इसमें रॉकेट और टॉरपीडो भी लगाए गए हैं, जिससे इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है.
दुश्मनों के लिए बड़ा संदेश
इस युद्धपोत के समुद्र में उतरने के बाद भारत की नौसैनिक ताकत और ज्यादा मजबूत होगी. इसकी स्टील्थ तकनीक इसे दुश्मनों की नजर से छिपाकर हमला करने में सक्षम बनाती है. यह युद्धपोत भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति का मजबूत उदाहरण है और वैश्विक स्तर पर भारत की ताकत को दर्शाता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर बताया कि वह इस एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ की कमीशनिंग सेरेमनी में शामिल होने के लिए विशाखापत्तनम में मौजूद रहेंगे. उन्होंने कहा कि यह कमीशनिंग भारत के पूर्वी समुद्री तट के रणनीतिक महत्व को दर्शाती है और भारतीय नौसेना की लड़ाकू तैयारी व ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत करती है. साथ ही यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती देने वाला कदम है.


