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ईरान वॉर के बीच अमेरिका को इन 4 देशों ने दिया झटका, सैन्य विमानों को उतारने से ट्रंप को रोका
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ईरान वॉर के बीच अमेरिका को इन 4 देशों ने दिया झटका, सैन्य विमानों को उतारने से ट्रंप को रोका

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Middle East Tensions: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ईरान के ऊपर दबाव बनाने में जुटे हैं, तो वहीं दूसरी ओर सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन न मिलने पर नाराज़ दिखाई दे रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से दूरी बना ली है.

दरअसल, फ्रांस, इटली, स्पेन और स्विटजरलैंड जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने एयरस्पेस या ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी. इससे अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं पर असर पड़ा है और ट्रंप की नाराज़गी भी बढ़ी है.

कई देशों ने अमेरिका को झटका

डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के बीच सहयोगी देशों के इस रुख से काफी नाराज नजर आए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब भविष्य में इन देशों को अमेरिकी मदद की जरूरत पड़ेगी, तब संयुक्त राज्य अमेरिका भी उनका साथ नहीं देगा. ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों पर तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि वे या तो अमेरिका से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) खरीदें या फिर Strait of Hormuz से खुद जाकर तेल लेकर आएं.

वहीं यूनाइटेड किंगडम ने भी इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया, हालांकि उसने क्षेत्र में अपने हितों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य बल और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने का फैसला किया है. ब्रिटेन का कहना है कि उसका उद्देश्य सीधे युद्ध में कूदना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और संभावित हमलों से अपने नागरिकों व सहयोगियों की रक्षा करना है.

वॉर और खिंचने की आशंका

यह स्थिति दिखाती है कि भले ही अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी नाटो के सदस्य हैं, लेकिन इस संघर्ष को लेकर सभी देशों की रणनीति और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं. यही वजह है कि अमेरिका को इस बार अपेक्षित वैश्विक समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जिससे भू-राजनीतिक समीकरण और जटिल होते जा रहे हैं.

दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों पर ही खत्म होगा. उन्होंने ईरान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसे अमेरिकी फैसलों को मानना ही होगा. वहीं, ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह कमजोर कर दिया है और अब उसके पास ज्यादा ताकत नहीं बची है.

उन्होंने यह भी कहा कि जो देश Strait of Hormuz का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें खुद आगे बढ़कर इसे खोलना चाहिए. ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह खत्म करने में भी पीछे नहीं हटेगा, हालांकि फिलहाल उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, और जैसे ही यह लक्ष्य पूरा होगा, होर्मुज स्ट्रेट अपने आप खुल जाएगा.

ये भी पढ़ें: 4700 सुरक्षाकर्मियों की मौत, 760 स्कूल और 300 हेल्थ सेंटर जमींदोज… US से वॉर में ईरान ने क्या-क्या खोया?



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