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अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन को बड़ा झटका, अदालत ने खारिज कर दी जमानत याचिका, जानें क्या कहा?
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अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन को बड़ा झटका, अदालत ने खारिज कर दी जमानत याचिका, जानें क्या कहा?

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दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी. सिद्दीकी ने अदालत से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से उन दस्तावेजों की सूची मांगी थी जिन पर एजेंसी ने भरोसा नहीं किया है. कोर्ट ने साफ कहा कि जांच अभी जारी है और प्री-कॉग्निजेंस मामले पर अदालत की ओर से संज्ञान लेने से पहले के चरण में ऐसी जानकारी देना संभव नहीं है.

क्या थी साकेत कोर्ट से जवाद सिद्दीकी की मांग?

सिद्दीकी की ओर से दलील दी गई थी कि उन्हें उन दस्तावेजों की सूची भी दी जानी चाहिए जिन पर ED ने भरोसा नहीं किया है. बचाव पक्ष ने अदालत में सरला गुप्ता बनाम ईडी मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस फैसले के अनुसार प्री-कॉग्निजेंस चरण में भी ऐसी सूची दी जा सकती है.

जांच एजेंसी ED ने किया विरोध

ईडी की ओर से पेश वकील ने इस मांग का विरोध किया. उन्होंने अदालत को बताया कि सिद्दीकी को BNSS की धारा 223 के तहत तलब किया गया है और इस चरण पर केवल वही दस्तावेज देना जरूरी होता है, जिन पर अभियोजन पक्ष भरोसा कर रहा है. उन्होंने कहा कि यदि इस समय ऐसे दस्तावेजों की सूची दे दी गई तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है और जांच की दिशा पर असर पड़ सकता है.

साकेत कोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि आरोपी को पहले ही प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और उससे जुड़े सभी भरोसेमंद दस्तावेज दिए जा चुके हैं. कोर्ट ने साफ किया कि प्री-कॉग्निजेंस चरण में अनरिलाइड डॉक्यूमेंट्स की सूची देना जरूरी नहीं है और इससे चल रही जांच पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसी आधार पर अदालत ने सिद्दीकी की याचिका में कोई दम नहीं पाया और इसे खारिज कर दिया.

मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुई थी गिरफ्तारी

जांच एजेंसी ईडी ने नवंबर 2025 में जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था. यह मामला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से संचालित शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को कथित तौर पर NAAC और UGC से मान्यता होने के गलत दावे दिखाकर दाखिला दिलाया गया.

415 करोड़ रुपये के गबन का आरोप

ED की जांच के मुताबिक, साल 2018 से 2025 के बीच लगभग 415.1 करोड़ रुपये की रकम छात्रों से फीस के रूप में ली गई. आरोप है कि इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा संस्थान के काम में लगाने के बजाय व्यक्तिगत उपयोग और अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया. यह जांच दिल्ली पुलिस में दर्ज दो FIR के आधार पर शुरू हुई थी. इन्हीं FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और एजेंसी कथित वित्तीय लेन-देन तथा ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.

यह भी पढ़ेंः West Bengal Assembly Elections 2026: ‘कभी पैर टूट जाता है, कभी पट्टी बांध लेती हैं’, बंगाल में अमित शाह ने ममता बनर्जी पर कसा तंज



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