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गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के उत्पीड़न की जांच सुप्रीम कोर्ट ने 3 महिला आईपीएस को सौंपी
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गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के उत्पीड़न की जांच सुप्रीम कोर्ट ने 3 महिला आईपीएस को सौंपी

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गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाए हैं. माता-पिता ने याचिका दाखिल कर बार-बार बच्ची को परेशान करने, धीमी जांच और कमजोर धाराएं लगाने की शिकायत की थी. सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों की पड़ताल के बाद पुलिस के कामकाज पर नाखुशी जताई. कोर्ट ने केस से जुड़े पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया.

कोर्ट के सख्त कदम
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने 3 महिला आईपीएस अधिकारियों- कला रामचंद्रन, नाजनीन भसीन और अंशु सिंगला की विशेष जांच टीम को जांच का जिम्मा सौंप दिया है. पीड़िता के बयान को दरकिनार कर अपराध का कमजोर ब्यौरा लिखने के लिए गुरुग्राम की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों को नोटिस जारी किया गया है. उनसे पूछा गया है कि उन्हें पद से क्यों न हटा दिया जाए. पहले बच्ची के यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट देने के बाद स्टैंड बदलने वाली मैक्स हॉस्पिटल की डॉक्टर को भी कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है.

पहले हुई सुनवाई में क्या हुआ था?
सबसे पहले शुक्रवार, 20 मार्च को वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने मामले को चीफ जस्टिस सूर्य कांत के सामने रखा था. उन्होंने बताया था कि मामले में घरेलू नौकरानी समेत कुछ लोग शामिल हैं. लेकिन किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. कोर्ट ने मामले को सोमवार, 23 मार्च को सुनवाई के लिए लगाया. इस बीच पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन कोर्ट ने इसे नाकाफी पाया.

जांच के नाम पर बच्ची को परेशान किया गया
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि बच्ची को बार-बार पुलिस स्टेशन, अस्पताल और बाल कल्याण समिति ले जाया गया. वर्दी में पुलिस वाले उसके पास आते रहे. उसे आरोपियों की पहचान के लिए उनके सामने खड़ा किया गया, जबकि यह प्रक्रिया आरोपियों के फोटो के जरिए की जा सकती थी. मजिस्ट्रेट ने भी असंवेदनशील तरीके से बर्ताव किया. उन्होंने बच्ची से बार-बार ‘सच बोलो, सच बोलो’ कहा. बच्ची से यह पूछताछ भी आरोपियों की मौजूदगी में की गई.

पुलिस कमिश्नर को किया था तलब
23 मार्च को चीफ जस्टिस ने मामले पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा था, ‘एक 4 साल की बच्ची को असंवेदनशीलता का सामना करना पड़ रहा है. पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की बजाय परिवार से पूछा कि वह क्या चाहता है. यह किस तरह की कार्यप्रणाली है?’ कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को पूरे रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में आने को कहा. अब केस की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है. मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी.

 

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