कर्नाटक सरकार ने मंगलवार (24 मार्च, 2026) को विधानसभा में ‘कर्नाटक प्रोहिबिशन ऑफ क्राइम्स इन द नेम ऑफ ऑनर, ट्रेडिशन एंड फ्रीडम ऑफ चॉइस इन मैरिज बिल, 2026’ को लंबी बहस के बाद पारित करवाया. इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बिल की प्रभावशीलता को लेकर तीखी चर्चा हुई.
राज्य के कानून मंत्री एच. के. पाटिल की ओर से पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य ऑनर किलिंग जैसे अपराधों पर रोक लगाना और अपनी पसंद से विवाह करने वाले युवाओं के अधिकारों की रक्षा करना है, खासकर अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहों के मामलों में.
बिल पेश करते हुए सदन में बोले कानून मंत्री
बिल पेश करते हुए कानून मंत्री ने कहा कि युवाओं को अपनी पसंद से शादी करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके बावजूद परिवारों की ओर से हिंसा और ऑनर किलिंग की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं. उन्होंने सदन से इस कानून का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है. विधेयक में ऐसे मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग, जिला स्तर पर निगरानी और संभावित हिंसा की आशंका होने पर पहले से रोकथाम के उपायों का प्रावधान किया गया है.
बिल को लेकर विस्तृत चर्चा की जरूरतः नेता विपक्ष
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बिल के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन इस पर और विस्तृत चर्चा की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि खासकर पुराने मैसूर क्षेत्र में ऑनर किलिंग के कई मामले सामने आए हैं और कानून में सजा के स्पष्ट प्रावधान और जातिगत समस्याओं के समाधान के लिए सामाजिक पहल भी जरूरी है.
विधेयक पर कई विधायकों ने उठाए सवाल
वहीं, विधायक सुरेश कुमार ने नए कानून की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) में पहले से ही ऐसे मामलों के लिए प्रावधान मौजूद हैं. उन्होंने पूछा कि यह बिल मौजूदा कानून से अलग क्या नया लेकर आया है.
MLA सुनील कुमार ने भी चिंता जताते हुए कहा कि यह विधेयक कहीं न कहीं पुराने प्रावधानों को ही दोहराता नजर आता है और इसमें कोई ठोस नई व्यवस्था नहीं दिखती. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कानून हेट स्पीच और सामाजिक ढांचे से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करता है.
कानून मंत्री ने सदन के सवालों का दिया जवाब
इन सवालों के जवाब में कानून मंत्री एच. के. पाटिल ने कहा कि यह विधेयक कई पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य उन सामाजिक प्रथाओं पर भी रोक लगाना है, जो अप्रत्यक्ष रूप से ऑनर आधारित हिंसा को बढ़ावा देती हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ परिवार विवाह का बहिष्कार करते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद के संस्कारों में शामिल होते हैं, जो सामाजिक रूप से हानिकारक है.
लंबी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद विधानसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया, जिसे राज्य में ऑनर किलिंग जैसे अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


