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19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ: जानें कलश स्थापना मुहूर्त, मां दुर्गा के नौ रूप और बाजारों में बढ़ी रौनक-Chaitra Navratri 2026 – News & Features Network
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19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ: जानें कलश स्थापना मुहूर्त, मां दुर्गा के नौ रूप और बाजारों में बढ़ी रौनक-Chaitra Navratri 2026 – News & Features Network

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Chaitra Navratri 2026 का पावन पर्व इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे न केवल देवी दुर्गा की उपासना का समय माना जाता है, बल्कि यह हिंदू नववर्ष के आगमन का भी प्रतीक है। जैसे-जैसे तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे घरों, मंदिरों और बाजारों में तैयारियां तेज होती जा रही हैं।

श्रद्धालु माता रानी के स्वागत के लिए पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। पूजा सामग्री, सजावट के सामान, व्रत से जुड़ी वस्तुएं और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आवश्यक सामग्री की खरीदारी जोरों पर है। हर तरफ भक्तिमय वातावरण देखने को मिल रहा है।


नवरात्रि की तैयारियों से सजे घर और मंदिर

चैत्र नवरात्रि के आगमन के साथ ही घरों और मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का दौर शुरू हो गया है। श्रद्धालु अपने घरों में माता रानी के लिए विशेष पूजा स्थान तैयार कर रहे हैं।

मंदिरों में भी विशेष सजावट की जा रही है। फूलों, रोशनी और रंग-बिरंगी सजावट से मंदिरों को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और जागरण की भी तैयारियां चल रही हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया है।


बाजारों में बढ़ी रौनक, पूजा सामग्री की खरीदारी तेज

Chaitra Navratri 2026 के चलते बाजारों में भी जबरदस्त चहल-पहल देखने को मिल रही है। दुकानदारों ने नवरात्रि को ध्यान में रखते हुए विशेष तैयारियां की हैं।

नारियल, चुनरी, कलश, माता की मूर्तियां, धूप-दीप, अगरबत्ती, फल और फूल जैसी पूजा सामग्री की मांग बढ़ गई है। खासकर महिलाएं बड़ी संख्या में बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंच रही हैं।

इसके अलावा व्रत रखने वाले लोगों के लिए साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा आटा और अन्य व्रत सामग्री की बिक्री भी तेजी से हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार नवरात्रि को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।


नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ समय

नवरात्रि को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए बेहद अनुकूल समय माना जाता है। इस दौरान लोग नए वाहन खरीदने, गृह प्रवेश करने और नए व्यापार शुरू करने की योजना बनाते हैं।

कई लोग इस अवधि में अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इस समय किए गए कार्यों में सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।


कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026 के पहले दिन कलश स्थापना (घट स्थापना) का विशेष महत्व होता है। यह माता दुर्गा के आगमन का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक संस्थान के ज्योतिष पंडित Sanjay Kumar के अनुसार, 19 मार्च को प्रतिपदा तिथि में सुबह 6:52 बजे से 10:26 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापित कर माता रानी की पूजा प्रारंभ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, प्रतिपदा तिथि को सृष्टि के आरंभ का दिन भी माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, जिससे यह दिन नवजीवन और सृजन का प्रतीक बन जाता है।


अभिजीत मुहूर्त का भी विशेष महत्व

यदि किसी कारणवश श्रद्धालु सुबह के निर्धारित समय में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो उनके लिए अभिजीत मुहूर्त एक उत्तम विकल्प माना गया है।

शुकतीर्थ स्थित ब्रह्मविद्यापीठ के आचार्य अशोक शुक्ल के अनुसार, 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। इस समय में किए गए कार्यों को अत्यंत शुभ और विजयी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मुहूर्त में आरंभ किए गए कार्यों में बाधाएं कम आती हैं और सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है।


मां दुर्गा के नौ रूपों की होगी आराधना

Chaitra Navratri 2026 के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

  • प्रथम दिन – मां शैलपुत्री

  • द्वितीय दिन – मां ब्रह्मचारिणी

  • तृतीय दिन – मां चंद्रघंटा

  • चतुर्थ दिन – मां कूष्मांडा

  • पंचम दिन – मां स्कंदमाता

  • षष्ठम दिन – मां कात्यायनी

  • सप्तम दिन – मां कालरात्रि

  • अष्टम दिन – मां महागौरी

  • नवम दिन – मां सिद्धिदात्री

हर दिन मां के अलग रूप की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शक्ति और समृद्धि का संचार होता है।


आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

चैत्र नवरात्रि सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी समय है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, ध्यान और पूजा-पाठ करते हैं और अपने मन को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं।

यह पर्व हमें आत्मसंयम, अनुशासन और भक्ति का संदेश देता है। साथ ही यह नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी है।


भक्ति, उत्साह और आस्था का संगम

जैसे-जैसे Chaitra Navratri 2026 नजदीक आ रहा है, पूरे देश में एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिल रही है। मंदिरों में घंटियों की आवाज, घरों में पूजा की तैयारियां और बाजारों की रौनक इस बात का संकेत दे रही है कि यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था और उत्साह का महापर्व है।


चैत्र नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर श्रद्धालु माता दुर्गा की आराधना के साथ अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। 19 मार्च से शुरू होने वाला यह नौ दिवसीय पर्व न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा, बल्कि समाज में सकारात्मकता और उत्सव की भावना को भी मजबूत करेगा। आने वाले दिनों में मंदिरों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भक्ति का जो वातावरण बनेगा, वह हर व्यक्ति को इस पावन पर्व से जोड़ने का कार्य करेगा।

 



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