दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च, 2026) को अगस्ता वेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाला मामले के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की रिहाई से जुड़ी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. मिशेल ने अदालत से दलील दी थी कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें भारत लाया गया था, उनकी अधिकतम सजा की अवधि वह पहले ही जेल में काट चुके हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जाए. हालांकि सीबीआई, ईडी और केंद्र सरकार ने इस मांग का कड़ा विरोध किया.
मिशेल ने भारत-UAE प्रत्यर्पण संधि के आर्टिकल 17 को दी चुनौती
यह मामला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच के सामने सुना गया. केंद्र सरकार ने मिशेल की याचिका का विरोध किया. मिशेल ने अपनी याचिका में भारत-UAE प्रत्यर्पण संधि के आर्टिकल 17 को भी चुनौती दी है. केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि मिशेल को दिसंबर 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाया गया था. उस समय 2017 की चार्जशीट में उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत देने जैसे आरोप लगाए गए थे.
बाद में, सितंबर 2020 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जालसाजी (फर्जीवाड़ा) का आरोप भी जोड़ा गया, जिसकी सजा उम्रकैद तक हो सकती है. इसलिए यह कहना गलत है कि मिशेल ने अधिकतम सजा पूरी कर ली है. केंद्र सरकार ने यह भी दलील दी कि प्रत्यर्पण संधि का आर्टिकल-17 भारत को उन अपराधों के साथ-साथ उनसे जुड़े अन्य अपराधों में भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है. इसी आधार पर जालसाजी के आरोप भी जोड़े गए हैं.
मिशेल ने जेल में बिताया है 5 साल से ज्यादा समयः वकील
दिल्ली हाई कोर्ट में मिशेल के वकील अल्जो के. जोसेफ ने कहा कि उनके मुवक्किल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े आरोपों के लिए पांच साल से अधिक समय जेल में बिताया है. इसलिए उन्हें रिहाई मिलनी चाहिए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट से उन्हें अलग-अलग मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन वह अब भी जेल में हैं. ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2025 में उनकी रिहाई की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं, जिनमें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.
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