ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के 14वें दिन समुद्र में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इस संबंध में फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर ईरानी बंदरगाहों पर फंसे भारतीय नाविकों की जान बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. यूनियन ने चेतावनी दी है कि संघर्ष के चलते जहाजों पर ईंधन, पीने के पानी और भोजन की भारी किल्लत हो गई है और आने वाले दिनों में वहां ब्लैकआउट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
ईरान में फंसे भारतीय नाविकों की लिस्ट सौंपें FSUI: DG शिपिंग
यूनियन के महासचिव मनोज यादव ने इस गंभीर मुद्दे पर ABP न्यूज से विशेष बातचीत की. उन्होंने बताया कि सरकार के पास जो 778 नाविकों का आंकड़ा है, वह सिर्फ आधिकारिक तौर पर पंजीकृत लोगों का है. असलियत इससे कहीं ज्यादा भयावह है. उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में भारतीय नाविक समुद्र में अलग-अलग विदेशी और ईरानी जहाजों पर फंसे हुए हैं, जिनका कोई भी सरकारी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.
इस विसंगति का मुख्य कारण बताते हुए मनोज यादव ने कहा कि इन नाविकों का चयन अवैध रूप से (Illegal Selection) हुआ है, जिसकी वजह से ये सरकारी आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाए. संकट की इस घड़ी में अब इन नाविकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है. उन्होंने कहा कि डीजी शिपिंग ने FSUI और अन्य यूनियनों से संपर्क किया है और आग्रह किया है कि अगर वे ऐसे किसी भी नाविक से संपर्क कर पाते हैं, तो उनकी सूची विभाग को सौंपी जाए.
FSUI ने सरकार को सौंपे 70 नाविकों के नाम
महासचिव ने आगे जानकारी दी कि यूनियन इस दिशा में युद्ध स्तर पर काम कर रही है. पिछले 24 घंटों के भीतर FSUI ने लगभग 70 ऐसे नाविकों की सूची सरकार को सौंपी है, जिनका नाम पहले किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था. ये नाविक वर्तमान में बंदर अब्बास, BIK ईरान, सिरी द्वीप और लावन द्वीप जैसे संवेदनशील इलाकों में फंसे हुए हैं और संचार सेवाएं ठप होने के कारण मदद की गुहार लगा रहे हैं.
FSUI की पीएम मोदी से अपील
FSUI के अध्यक्ष बंकिम भारती और महासचिव मनोज यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि सरकार जल्द से जल्द इन नाविकों तक बुनियादी जरूरतें जैसे भोजन और पानी पहुंचाने के लिए राजनयिक कदम उठाए. यूनियन का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ईरानी बंदरगाहों पर फंसे इन हजारों भारतीयों के लिए स्थिति अनियंत्रित हो जाएगी और मानवीय संकट गहरा सकता है.
यह भी पढ़ेंः अमेरिकी हमले से दहला खर्ग, 15 से अधिक धमाकों की सुनी गई आवाज, तेल निर्यात के बेहद करीब है ये इलाका


