सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें हिंदुओं को लेकर आपत्तिजनक व्हॉट्सऐप मैसेज फॉरवर्ड करने के आरोप में एक शख्स पर एफआईआर रद्द करने की अपील की गई है. गुरुवार (12 मार्च, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए मध्य प्रदेश पुलिस और अन्य को नोटिस भेजा है.
इस मैसेज में कहा गया था- ‘अच्छा हिंदू होने के लिए गोमांस का सेवन आवश्यक है.’ जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच के सामने यह याचिका लगी थी, जिसे बुद्ध प्रकाश बौद्ध नाम के शख्स ने दायर किया है.
बुद्ध प्रकाश बौद्ध ने पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करके उनके खिलाफ मुकदमा रद्द करने की मांग की थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी, जिसके बाद बुद्ध प्रकाश बौद्ध ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया उन अपराधों के तत्वों को दर्शाते हैं जिनके तहत मामला दर्ज किया गया है.
हाईकोर्ट ने कहा था, ‘वर्तमान मामला ऐसी सामग्री के प्रकाशन या प्रसार से जुड़ा है जो धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती है या समाज में असहमति और वैमनस्य को बढ़ावा दे सकती है. विवादित प्राथमिकी में लगाए गए आरोप, अगर अपने मूल रूप में देखे जाएं, तो प्रथम दृष्टया लगाए गए अपराधों के तत्वों को दर्शाते हैं.’
पुलिस का कहना है कि बुद्ध प्रकाश बौद्ध ने व्हाट्सएप पर सात पेज का एक संदेश पोस्ट किया था, जिसमें हिंदू धर्म और ब्राह्मण समुदाय के बारे में अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियां की गई थीं. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संदेशों में यह दावा किया गया था कि ‘अच्छा हिंदू बनने के लिए गोमांस का सेवन आवश्यक है और कुछ अवसरों पर बैलों की बलि और मांस का सेवन अनिवार्य होता है.’
संदेशों में यह भी कहा गया था कि ब्राह्मण नियमित रूप से गौवंश का मांस खाते थे और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में गायों और बैलों की कथित रूप से बलि दी जाती थी. इसके बाद बौद्ध के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.


