प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बिजनेसमैन अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ बुधवार (11 मार्च, 2026) को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. ईडी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में 581.65 करोड़ रुपये की 31 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है.
ईडी के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियां देश के कई राज्यों में फैली हुई हैं, जिनमें गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित जमीन के टुकड़े शामिल हैं.
पहले भी हजारों करोड़ की संपत्ति हो चुकीं जब्त
ईडी ने बताया कि इससे पहले भी RHFL, RCFL और रिलायंस कम्युनिकेशन्स (RCOM) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में 15,729 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं. ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी कुल अटैच संपत्तियों का आंकड़ा लगभग 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
इसके अलावा, छापेमारी के दौरान 2.48 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त या फ्रीज की गई है. यह रकम फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और नकदी के रूप में थी. जबकि, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक खातों में मौजूद करीब 77.86 करोड़ रुपये भी फ्रीज किए गए हैं.
सीबीआई की एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच
ईडी ने इस मामले में जांच 22 जुलाई, 2025 को शुरू की थी. यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कई एफआईआर के आधार पर की गई थी. ये एफआईआर यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों के बाद दर्ज हुई थीं.
जांच में सामने आया कि RHFL और RCFL ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इनमें से 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बाद में NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) में बदल गई.
शेल कंपनियों के जरिए पैसे की हेराफेरी
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इन कंपनियों से जुटाए गए पैसे को कई दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया. इनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पॉवर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशन्स और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, यह पैसा बड़ी संख्या में शेल या डमी कंपनियों के जरिए घुमाया गया. इन कंपनियों के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि थी.


