कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक रेप केस पर सुनवाई करते हुए बेहद अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि कानून दिल टूटने को अपराध नहीं मानता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि सहमति से बने संबंधों के बाद अगर शादी से इनकार किया जाता है, तो यह दुखद है, लेकिन इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता है.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एक शख्स ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के सेक्शन 69 और 115(2) के तहत महिला की ओर से दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी. एफआईआर में महिला ने याचिकाकर्ता पर शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाने के आरोप लगाए हैं.
कर्नाटक हाईकोर्ट के जज जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा, ‘जहां दो वयस्क अपनी मर्जी से लंबे समय तक आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं, उसके बाद अगर पुरुष महिला से शादी करने से इनकार कर देता है, तो यह कृत्य चाहे कितना भी खेदजनक क्यों न हो, सिर्फ इस आधार पर उस संबंध को आईपीसी की धारा 376 के तहत बलात्कार के अपराध में नहीं बदला जा सकता है’.
कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि शिकायत को पूरा पढ़ने पर कहीं भी जबरदस्ती, शुरुआत से धोखा या बल प्रयोग का जिक्र नहीं है. यह शिकायत दो साल चले लिव-इन रिलेशनशिप, साझा घरेलू जीवन और आपसी सहमति वाले संबंधों के बारे में बात करती है.
कोर्ट ने कहा कि यह दोनों दो साल साथ रहे और उसके बाद जो हुआ, उसमें हिंसा का आरोप नहीं, बल्कि विश्वासघात का आरोप है इसलिए यह शुरुआत से धोखे में रखकर शारीरिक संबंध बनाने का मामला नहीं है. यह कानून का एक स्थापित सिद्धांत है कि कानून दिल टूटने को अपराध नहीं मानता.
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि शादी का वादा झूठा तब माना जाता है, जब यह साबित हो जाए कि वह वादा सिर्फ एक छल या धोखेबाजी की चाल थी, जिसे कभी पूरा करने का इरादा ही नहीं था. कोर्ट ने कहा कि बाद में मन बदल जाना या तालमेल न बैठना, परिवार का विरोध या सिर्फ शादी करने में हिचकिचाहट- इन बातों को रिश्ते की शुरुआत में आपराधिक इरादा नहीं माना जा सकता.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत रद्द करते हुए कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था को संबंधों के असफल होने पर हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. याचिकाकर्ता महिला से आयरलैंड में मिला था, दोनों वहां पढ़ाई करने गए थे. बाद में उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई और दोनों ने लिव-इन में रहने का फैसला किया.
महिला ने एफआईआर में कहा कि दोनों लंबे समय तक लिव-इन में रहे और इस दौरान उनके बीच शारीरिक संबंध बने. महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी है. हालांकि, महिला का कहना है कि उसका अपने पति से तलाक का मामला पहले से ही चल रहा था. बाद में महिला के याचिकाकर्ता से रिश्ते खराब हो गए और भारत लौटने पर उसने याचिकाकर्ता के खिलाफ शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का मामला दर्ज कर दिया.


