पश्चिम बंगाल में स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. इन लोगों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार (10 मार्च, 2026) को उनकी याचिका पर सुनवाई करेगा.
सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच के सामने मामला रखते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर कोर्ट ने कल की तारीख दे दी. मेनका गुरुस्वामी ने कहा, ‘ये मतदाता हैं, इन्होंने पहले मतदान किया था, लेकिन अब उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए.’
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘हम न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों के खिलाफ अपील को रोक नहीं सकते.’ एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि अपील विचारयोग्य है. इस पर बेंच ने कहा कि याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी को एसआईआर प्रक्रिया में 80 लाख दावों और आपत्तियों को निपटाने के लिए पश्चिम बंगाल के 250 डिस्ट्रिक्ट जजों के अलावा दीवानी न्यायाधीशों की तैनाती और झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दी थी.
बेंच ने 22 फरवरी को लिखे कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के पत्र पर भी गौर किया जिसमें कहा गया था कि एसआईआर में तैनात 250 जिला न्यायाधीशों को भी दावों और आपत्तियों को निपटाने में लगभग 80 दिन और लग सकते हैं. साल 2002 की मतदाता सूची में दर्ज तर्कसंगत विसंगतियों में माता-पिता के नाम का मेल न होना और मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक होना शामिल है.
सीजेआई सूर्यकांत ने नए निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा था कि अगर हर न्यायिक अधिकारी हर दिन 250 दावे और आपत्तियों को निपटाए, तब भी यह प्रक्रिया लगभग 80 दिन में पूरी होगी. पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया संपन्न की समयसीमा 28 फरवरी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने नौ फरवरी को स्पष्ट किया था कि कोई भी व्यक्ति एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. साथ ही कोर्ट ने पश्चिम बंगाल डीजीपी को चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस कुछ लोगों द्वारा जलाए जाने के आरोपों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था.



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