सियासत का हॉट स्पॉट बने पश्चिम बंगाल में अब राजनीतिक सुगबुगाहट तेज हो गई है. गुरुवार को हैरान करने वाले खबर सामने आई, जिसे वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परेशान करने वाला बताया है. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक इस्तीफा दे दिया. राज्यपाल के पद से इस्तीफा देने के सीवी आनंद बोस के फैसले पर ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट किया है.
मुख्यमंत्री बनर्जी ने अपने पोस्ट में कहा, ‘पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस के इस्तीफे की अचानक आई खबर से मैं हैरान और बहुत परेशान हूं. उनके इस्तीफे के पीछे की वजहें मुझे अभी पता नहीं हैं. हालांकि वर्तमान हालात को देखते हुए मुझे हैरानी नहीं होगी, अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला हो.’
I am shocked and deeply concerned by the sudden news of the resignation of Shri C. V. Ananda Bose, the Governor of West Bengal.
The reasons behind his resignation are not known to me at this moment. However, given the prevailing circumstances, I would not be surprised if the…
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) March 5, 2026
बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री ने अभी मुझे बताया कि श्री आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का गवर्नर बनाया जा रहा है. उन्होंने इस बारे में तय रिवाज के अनुसार मुझसे सलाह नहीं ली है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे फैसले भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं. हमारे फ़ेडरल स्ट्रक्चर की बुनियाद पर ही हमला करते हैं. केंद्र को कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए. ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक रिवाजों और राज्यों की गरीमा को कमजोर करते हैं.
साल 2022 में बनाया गया था डॉ. आनंद बोस को राज्यपाल
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. 17 नवंबर 2022 में डॉ. आनंद बोस को बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. उनसे पहले मणिपुर के तत्कालीन राज्यपाल ला गणेशन बतौर अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था. बोस को इस पद पर तब नियुक्त किया गया था, जब राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भारत का उपराष्ट्रपति चुने गए थे.
बता दें, सीवी आनंद बोस 1977 बैच के IAS अफसर हैं. वह केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले हैं. वह एक राइटर भी हैं. उनकी इंग्लिश, मलयालम और हिंदी में करीबन 40 से ज्यादा किताबें पब्लिश हो चुकी हैं. वह उस समूह का हिस्सा भी रहे हैं, जिन्होंने नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए एजेंडा तैयार करने में मदद की थी.


