तेलंगाना के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) वारंगल में धार्मिक पक्षपात और छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर जो बवाल खड़ा हुआ था, वह आज एक सकारात्मक मोड़ लेकर शांत हो गया. संस्थान के डायरेक्टर डॉ. बिद्याधर सुबुधि ने आज परिसर में आयोजित हनुमान चालीसा के पाठ में शिरकत करके विश्व हिंदू परिषद (VHP) की तरफ से लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने न केवल कार्यक्रम में भाग लिया बल्कि छात्रों की इस पहल की खुलकर सराहना भी की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासन किसी भी धर्म के प्रति पक्षपाती नहीं है.
मंगलवार को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रविनूतला शशिधर ने संस्थान के डायरेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया था कि कैंपस में नमाज के लिए अलग कमरे दिए जाते हैं और ईसाई संगठनों को सहूलियतें मुहैया कराई जाती हैं, लेकिन मात्र 15 मिनट के हनुमान चालीसा के पाठ को रोका जा रहा है. प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि छात्रों के फोन जब्त कर लिए गए हैं और उन्हें संस्थान से निष्कासित करने की धमकी दी जा रही है, जिसके लिए उन्होंने डायरेक्टर के तत्काल बर्खास्तगी की मांग भी की थी. इस बयान के बाद सोशल मीडिया और छात्र समुदाय में काफी नाराजगी देखने को मिली थी और प्रशासन पर दोहरे मानकों का आरोप लग रहा था.
हनुमान चालीसा का कार्यक्रम संपन्न हुआ
हालांकि, आज जब हनुमान चालीसा का कार्यक्रम संपन्न हुआ तो स्थिति पूरी तरह बदल गई. डायरेक्टर डॉ. सुबुधि ने आरोपों का मुकाबला बयानबाजी से नहीं, बल्कि अपनी मौजूदगी से किया. वे कार्यक्रम के दौरान छात्रों के बीच बैठे और उनके साथ मिलकर पाठ में शामिल हुए. कार्यक्रम के अंत में उन्होंने छात्रों के उत्साह और उनकी आस्था की सराहना की. इस कदम ने साबित कर दिया कि पिछले दिनों लगाए गए आरोपों में दम नहीं था और प्रशासन सभी धर्मों के साथ समान आदर भाव रखता है. छात्रों ने भी डायरेक्टर के इस रुख का स्वागत किया और परिसर में सद्भाव का माहौल बना रहा.
शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद
शैक्षणिक संस्थानों में अक्सर धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद उठ खड़े होते हैं, खासकर जब सोशल मीडिया पर कोई जानकारी आधी-अधूरी होकर वायरल होती है. इस घटना ने एक बार फिर संवाद की महत्ता को रेखांकित किया है. एनआईटी वारंगल के डायरेक्टर के इस निर्णय ने न केवल तनाव को कम किया है, बल्कि छात्रों और प्रशासन के बीच की खाई को भी पाट दिया है. यह घटना उन सभी अफवाहों पर भी पानी फेरती है जिनमें कहा गया था कि प्रशासन किसी विशेष समुदाय के प्रति कठोर रुख अपनाए हुए है. फिलहाल, परिसर में शांति बनी हुई है और शिक्षण कार्य अपनी गति से चल रहा है.


