राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भारत को वैश्विक सम्मान फिर से प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक समाज हिंदू भावना में एकजुट रहेगा, दुनिया की कोई भी शक्ति देश को नष्ट नहीं कर सकती.
हिंदू धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा में पूर्वजों के बलिदानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अन्य देशों की चुनौतियों के बावजूद भारत प्रौद्योगिकी, विज्ञान और आर्थिक विकास में तेजी से प्रगति कर रहा है.
तेजी से आगे बढ़ रहा भारत- होसबले
ANI के मुताबिक जयपुर में शनिवार को एक सभा को संबोधित करते हुए होसबले ने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने इस हिंदू भूमि, हिंदू धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए कितने साहस से बलिदान दिया. आजादी के इतने दशकों बाद, भारत को दुनिया भर के अन्य देशों में सम्मान फिर से प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है. हम इसे अनुभव कर रहे हैं. दुनिया के कई देश प्रौद्योगिकी, विज्ञान, उद्योग और आर्थिक समृद्धि में आगे हो सकते हैं. भारत भी इन क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है.”
उन्होंने आगे कहा कि कुछ अन्य देश हमें दबाने और कुचलने का प्रयास भी कर सकते हैं लेकिन जब तक यह राष्ट्र, यह समाज, हिंदू भावना में एकजुट रहेगा, तब तक दुनिया में किसी के पास भारत को नष्ट करने की शक्ति नहीं होगी. इसी तरह की ‘हिंदू एकता’ की बात आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी हाल ही में दोहराई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदू समाज को “सतर्क” रहने की जरूरत है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी से “कोई खतरा नहीं” है.
‘घर वापसी की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए’
लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव की एक सभा में बोलते हुए मोहन भागवत ने घटती हिंदू आबादी पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने लालच और जबरदस्ती से प्रेरित धर्मांतरण को रोकने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि घर वापसी की प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए और हमें हिंदू धर्म में लौटने वालों की देखभाल करनी चाहिए.
‘घुसपैठियों को वापस भेजा जाना जरूरी’
बढ़ती घुसपैठ पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों का पता लगाकर उन्हें खत्म किया जाना चाहिए और निर्वासित किया जाना चाहिए और उन्हें रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम सब एक ही देश, एक ही मातृभूमि के पुत्र हैं. मनुष्य के रूप में हम सब एक हैं. एक समय ऐसा था, जब कोई भेदभाव नहीं था, लेकिन समय के साथ भेदभाव एक आदत बन गया है, जिसे जड़ से उखाड़ फेंकना होगा.
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