तेलंगाना के कामारेड्डी जिले में बीते दिनों हुई बंसवाड़ा हिंसा के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP) से बातचीत की. तत्काल FIR दर्ज कराने और सख्त जांच की मांग की.
यह घटना उस समय सामने आई जब प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव लगातार बढ़ रहा है. बंसवाड़ा की घटना में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में ही उस समय पिटाई होने का आरोप लगाया गया, जब वह पुलिस के साथ था.
AIMIM चीफ ओवैसी ने उठाए सवाल
ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि अचानक कुछ ही घंटों में इतनी बड़ी भीड़ कैसे जुट गई? उन्होंने दावा किया कि मौजूद वीडियो गवाही दे रहे हैं कि भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के छोटे दुकानदारों और फेरी वालों को निशाना बनाया. स्थिति यह है कि पुलिस को भी बचाव के लिए सक्रिय होना पड़ा.
बयान में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि जब आरोपी पुलिस के पास था, तब भी उसके साथ मारपीट की गई. उन्होंने पार्टी के जिला महासचिव सईद खान को निर्देश दिए हैं कि वे मुस्लिम दुकानों को हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट तैयार करें. AIMIM ने सरकार से साफ तौर पर मांग की है कि जिनकी संपत्ति टूटी है, उन्हें सरकारी खजाने से मुआवजा दिया जाना चाहिए. पार्टी ने पीड़ितों की मदद के लिए राहत कार्य भी शुरू कर दिए हैं.
क्या है सदाशिवपेट में मस्जिद-ए-मौलाना के ध्वस्तीकरण का मुद्दा ?
इसी बीच, सदाशिवपेट में मस्जिद-ए-मौलाना के ध्वस्तीकरण का मुद्दा भी गरमाया हुआ है. ओवैसी ने कारवां विधायक कौसर मोहिउद्दीन और जिला अध्यक्ष शेख ग़ौस को मामले में दखल देने को कहा है. मालिक मोहम्मद कलीम का कहना है कि उन्होंने यह जमीन दो साल पहले एक व्यक्ति राजू से खरीदी थी और वे उस पर कब्जा भी किए हुए थे.
उन्होंने वहां बोरवेल भी खुदवाया था, लेकिन जैसे ही उन्होंने शेड डाला, राजस्व अधिकारियों ने इसे ‘इनाम जमीन’ होने का हवाला देते हुए तोड़ दिया. ओवैसी ने सवाल उठाया कि पिछले दो सालों से कब्जा चल रहा था, तब प्रशासन कहां था? विरोधियों द्वारा लगातार परेशान किए जाने के बावजूद प्रशासन का अचानक जागना सवालों के घेरे में है. यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई और सांप्रदायिक सद्भाव के बीच टकराव का केंद्र बन गया है.


