पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों की सुनवाई न्यायिक अधिकारी (जज) करेंगे. राज्य सरकार और चुनाव आयोग की तरफ से एक-दूसरे पर लगाए गए आरोपों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य में SIR प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया है कि वह जिला जज (DJ) या ADJ स्तर के न्यायिक अधिकारियों को SIR के लिए उपलब्ध करवाएं. इनमें सेवारत अधिकारियों के अलावा सेवानिवृत्त अधिकारी भी हो सकते हैं. यह सभी वर्तमान या पूर्व जज ऐसे हों जिनका रिकॉर्ड बेदाग रहा हो.
पश्चिम बंगाल में इस समय लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (तार्किक विसंगति) श्रेणी में आए लोगों के दस्तावेजों की जांच चल रही है. पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग पर विशेष अधिकारी नियुक्त कर जांच को कठिन बनाने का आरोप लगाया था. वहीं चुनाव आयोग ने कहा था कि राज्य सरकार ने उसकी जरूरत के मुताबिक योग्य और वरिष्ठ (क्लास A) अधिकारी उपलब्ध नहीं करवाए इसलिए, उसे विशेष अधिकारी नियुक्त करने पड़े. इस बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए असाधारण आदेश दे रहा है.
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में SIR की फाइनल लिस्ट का प्रकाशन 28 फरवरी को होना है. वह प्रयास करेगा कि तब तक काम पूरा हो जाए. अगर जरूरत पड़ी तो इसके बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की जाएगी. कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि चुनाव आयोग 28 फरवरी को लिस्ट के प्रकाशन का प्रयास करे, लेकिन इस लिस्ट को अंतिम न समझा जाए. जरूरत पड़ने पर आयोग इसके बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर सकता है.
राज्य में SIR प्रक्रिया को उपद्रवियों की तरफ से बाधित करने के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चिंता जताई है. इस बारे में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की तरफ से दाखिल जवाब पर कोर्ट ने असंतोष जताया और उनसे कहा कि वह SIR के काम में बाधा डालने को लेकर मिली शिकायतों पर एक्शन लेकर रिपोर्ट पेश करें. मामले की अगली सुनवाई मार्च के पहले सप्ताह में होगी.


