असम में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने हिमंता सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस महासचिव और असम की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुवाहाटी में हिमंत सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी की है, जिसमें राज्य की जनता की ओर से आरोप लगाए गए हैं. प्रियंका गांधी का कहना है कि इस चार्जशीट को बनाने के लिए तीन महीने तक जनता से संवाद किया गया था और उनसे समस्याएं पूछी गई थीं. यह जनता की राय है, जो इस चार्जशीट में दी गई है.
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए हैं असम की बीजेपी सरकार पर?
कांग्रेस ने पीपुल्स चार्जशीट नाम से इसे पेश किया है. इसमें असम की जनता बनाम असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की भाजपा सरकार (2021-2026) नाम से पेश किया गया है. इसमें बिंदुवार तरीके से कांग्रेस की तरफ से बीजेपी की असम सरकार के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं.
- असम में ‘सिंडिकेट राज’ को संस्थागत रूप देना और काले धन से चलने वाली समानांतर अर्थव्यवस्था की स्थापना.
- हिमंता बिस्वा सरमा के करीबी मंत्रियों और उनके परिवारों द्वारा व्यापक भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति का संचय.
- बढ़ता कर्ज, गैर-जिम्मेदाराना शासन और वित्तीय कुप्रबंधन.
- 6 समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने में विफलता (कोच राजबोंगशी, ताई अहोम, मोरान, मोटोक, चुटिया और आदिवासी चाय जनजातियां).
- असम की स्वदेशी भूमि को कॉरपोरेट विस्तार के लिए सौंपना.
- 1985 के असम समझौते को कमजोर करना और असमिया पहचान की रक्षा सुनिश्चित करने वाले क्लॉज 6 को जानबूझकर लागू न करना.
- एनआरसी परियोजना को ठप करना और आधिकारिक माध्यमों से भय का माहौल बनाकर समुदायों को लगातार ब्लैकमेल करना.
- असम की बारहमासी बाढ़ और नदी तट कटाव को राष्ट्रीय आपदा का दर्जा दिलाने में विफलता.
- नए रोजगार सृजित करने में विफलता; सरकारी रिक्तियों को आंशिक रूप से भरने को रोजगार बताने की नौटंकी, यूथ एक्सपोर्ट पॉलिसी के तहत असम को श्रम आपूर्ति राज्य में बदलना.
- सरकारी शिक्षा को कमजोर करना और गरीबों के बच्चों को शिक्षा के अवसरों से वंचित करना.
- बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं देने में विफलता, जिससे गरीब लोगों में रोकी जा सकने वाली मौतें.
- गरीब चाय बागान श्रमिकों के साथ धोखा, ₹351 दैनिक मजदूरी के लंबे समय से किए गए वादे को लागू करने में विफलता.
- बुलडोजर न्याय और अल्पसंख्यकों की चयनात्मक बेदखली.
- कठोर उपायों, पुलिस मुठभेड़ों और ‘काउबॉय न्याय’ के जरिए भय का माहौल बनाकर संवैधानिक शासन को कमजोर करना.
- असम में महिलाओं और बच्चों को हिंसा, अत्याचार, यौन अपराध और तस्करी से बचाने में विफलता.
- पर्यावरणीय भ्रष्टाचार-असम के पर्यावरण को खनन और वन माफिया को बेचा जा रहा है.
- नशीले पदार्थों के खतरे का चिंताजनक प्रसार केवल पीआर के लिए कभी-कभार जब्ती, बिना स्थायी समाधान के.
- अवैध रैट-होल खनन में सरकारी मिलीभगत असम के खनिज संपन्न क्षेत्रों को ‘डेथ वैली’ में बदलना.
- शहरी नियोजन की विफलता, जिसके कारण कचरा प्रबंधन में गड़बड़ी, सीवरेज ओवरफ्लो और जलमग्न शहर.
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करना.


