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तेलंगाना निकाय चुनाव: ‘पंजे’ ने दिखाया दम, BRS की कार हुई पंचर, जानें कहां-किसने लहराया परचम?
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तेलंगाना निकाय चुनाव: ‘पंजे’ ने दिखाया दम, BRS की कार हुई पंचर, जानें कहां-किसने लहराया परचम?

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तेलंगाना की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है. शुक्रवार (13 फरवरी, 2026) को सुबह ठीक आठ बजे शुरू हुई मतगणना ने राज्य के शहरी इलाकों में जनता के रुझानों को साफ कर दिया है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने 116 नगर पालिकाओं और 7 नगर निगमों में जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए विपक्ष को खामोश कर दिया है.

इन चुनावों का नतीजा अब तक की सत्ताधारी पार्टी बीआरएस के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ है, जबकि कांग्रेस ने कुल 2,582 वार्डों में से 1,347 वार्डों पर कब्जा जमाकर अपना दबदबा कायम किया है.

आंकड़ों में क्या रहा पार्टियों के जीत का गणित?

वायरल हो रहे आंकड़ों और आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार कांग्रेस ने सीधे 64 नगर पालिकाओं पर अपना कब्जा जमाया है. वहीं, पूर्व सत्ताधारी पार्टी बीआरएस (BRS) महज 13 नगर पालिकाओं और 717 वार्डों तक सिमट कर रह गई है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी का शहरी बुनियाद ढह रहा है.

वहीं, भाजपा (BJP) ने भी 261 वार्डों में जीत के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन वह कांग्रेस की गति को रोक नहीं सकी. सबसे रोचक परिणाम कोठागुडेम नगर निगम के रहे, जहां कांग्रेस और सीपीआई (CPI) 22-22 सीटों पर बराबरी पर हैं. यहां 8 सीटों वाली बीआरएस ‘किंग मेकर’ (King Maker) बनकर उभरी है और अब सभी की नजरें उस पर हैं कि वह किसका साथ देती है.

चुनाव से पहले भाजपा उम्मीदवार ने की थी आत्महत्या

इस दौरान एक दर्दनाक घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया. नारायणपेट जिले की मकतल नगर पालिका के वार्ड नंबर-6 से भाजपा उम्मीदवार यरुकला महादेवप्पा ने चुनाव से पहले आत्महत्या कर ली थी, जिसके चलते वहां वोटिंग रद्द हो गई थी. हालांकि, बाकी 16 वार्डों में कांग्रेस ने 12 सीटें जीतकर जनता का दिल जीता है. वहीं, महबूबनगर के वडेपल्ली में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की जीत ने इस चुनाव को और रोचक बनाया है. मंचेरियाल, रामागुंडम और नलगोंडा जैसे बड़े निगमों में कांग्रेस का क्लीन स्वीप रहा है.

स्थानीय चुनावों में कांग्रेस की नीतियों का दिखा असर

तेलंगाना में विधानसभा चुनावों के बाद यह पहला बड़ा स्थानीय चुनाव था, जिसे रेवंत रेड्डी सरकार के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा था. पिछले कुछ सालों से बीआरएस का दबदबा राज्य में था, लेकिन पार्टी में बगावत और नेतृत्व की नीतियों ने उन्हें कमजोर किया है. कांग्रेस ने प्रजा पालन (जनता का शासन) और कल्याणकारी योजनाओं के वादों के साथ मैदान में उतरकर मतदाताओं का भरोसा जीता है. 38 नगर पालिकाओं में हंग (Hung) की स्थिति बनने के चलते अब जोड़-तोड़ की राजनीति भी तेज होने वाली है.

16 फरवरी को होगा शपथ ग्रहण

इस जीत ने तेलंगाना में कांग्रेस की पकड़ को और मजबूत किया है. सोमवार (16 फरवरी, 2026) को नए पार्षद और कॉरपोरेटर अपने पद की शपथ लेंगे, जिसके बाद मेयर और चेयरमैन के चुनाव का दौर शुरू होगा. जहां एक तरफ कांग्रेस के लिए यह जश्न का समय है, वहीं बीआरएस के लिए आत्ममंथन का. यह नतीजा साफ संदेश देता है कि जनता अब बदलाव चाहती है और विकास के मुद्दों को ही अपनी प्राथमिकता दे रही है.



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