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हैदराबाद का बदला नक्शा! GHMC टूटकर तीन हिस्सों में बंटा, साइबराबाद और मल्काजगिरी को नई पहचान
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हैदराबाद का बदला नक्शा! GHMC टूटकर तीन हिस्सों में बंटा, साइबराबाद और मल्काजगिरी को नई पहचान

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तेलंगाना सरकार ने 10 फरवरी 2026 को एक बड़ा फैसला लिया. हैदराबाद शहर को संभालने वाला ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) अब तीन अलग-अलग नगर निगमों में बांट दिया गया है. यह कदम शहर के बेहतर कामकाज और तेज विकास के लिए उठाया गया है. फैसले के बाद से तीन अलग-अलग नगर निगमों—’साइबराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’, ‘मल्काजगिरी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ और ‘ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ में विभाजित कर दिया गया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जयेश रंजन को इन तीनों निगमों की देखरेख के लिए विशेष अधिकारी (Special Officer) नियुक्त किया गया है.

इस बड़े फैसले के तहत, आईटी हब के रूप में विकसित हुए क्षेत्रों  सेरिलिंगमपल्ली, कुकटपल्ली और कुतबुल्लापुर को मिलाकर ‘साइबराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ बनाया गया है, जिसकी कमान आयुक्त जी श्रीजना को सौंपी गई है. वहीं, उपनगरीय क्षेत्रों मल्काजगिरी, उप्पल और एलबी नगर को शामिल करते हुए ‘मल्काजगिरी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ का गठन किया गया है, जिसके आयुक्त टी विनय कृष्ण रेड्डी होंगे. दिल के शहर (Old City) और ऐतिहासिक क्षेत्रों को संभालने वाला नया ‘ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ अब शमशाबाद, राजेंद्रनगर, चारमीनार, गोलकोंडा, खैराताबाद और सिकंदराबाद जोन्स को नियंत्रित करेगा, जिसका नेतृत्व आरवी कर्णन करेंगे.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैली खबर

यह खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे @TeluguScribe, @tv9 और @TelanganaToday पर आग की तरह फैल रही है. अधिकारियों ने जैसे ही यह आदेश जारी किया, लोगों ने इसका स्वागत किया है. दरअसल, लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि विशाल भौगोलिक क्षेत्र और बढ़ती जनसंख्या के कारण एक ही निगम से शहर का प्रबंधन मुश्किल हो रहा है. पिछले कई सालों में शहर के बढ़ते विस्तार और गैर-योजनाबद्ध विकास को देखते हुए यह कदम लिया गया है. यह विभाजन न केवल शहर के ढांचे को बदलेगा, बल्कि आम आदमी तक सेवाएं पहुंचाने में भी तेजी लाएगा.

हैदराबाद अब एक नए दौर में किया प्रवेश 

इस ऐतिहासिक फैसले के साथ, हैदराबाद अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है. विशेष अधिकारी जयेश रंजन की निगरानी में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विभाजन की प्रक्रिया आम नागरिकों पर कोई बोझ न डाले और विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए. अब देखने वाली बात यह होगी कि तीनों नए निगम यह जिम्मेदारी कितनी सफलता के साथ निभाते हैं.



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