युद्ध के मैदान में फाइटर जेट के मामले में माइलेज का मतलब बिल्कुल अलग होता है. वॉर के समय सबसे ज्यादा जरूरी होती है तेज रफ्तार, ताकत और मिशन की सफलता. यही वजह है कि फाइटर जेट बहुत ज्यादा फ्यूल खर्च करते हैं. फाइटर जेट का माइलेज किलोमीटर प्रति लीटर में नहीं, बल्कि मीटर प्रति लीटर में मापा जाता है. यानी 1 लीटर फ्यूल में ये सिर्फ 200 से 400 मीटर तक ही उड़ पाते हैं. Simple Flying वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक राफेल या F-16 जैसे मध्यम श्रेणी के जेट सामान्य गति पर करीब 300 से 400 मीटर प्रति लीटर का माइलेज देते हैं. यानी 1 किलोमीटर उड़ने में लगभग 2.5 से 3 लीटर ईंधन लग सकता है.
अगर जेट आफ्टरबर्नर मोड में चला जाए तो ईंधन की खपत 3 से 4 गुना तक बढ़ जाती है. इस दौरान माइलेज घटकर 100 मीटर प्रति लीटर या उससे भी कम हो सकता है. आफ्टरबर्नर इंजन को अतिरिक्त ताकत देता है, जिससे जेट बहुत तेज स्पीड पकड़ लेता है.
कौन से जेट ज्यादा ईंधन खर्च करते हैं?
ट्विन इंजन और भारी जेट सबसे ज्यादा फ्यूल खर्च करते हैं. जैसे F-22 Raptor और Su-30 MKI. F-22 एक घंटे में 8,000 से 10,000 लीटर तक फ्यूल जला सकता है. Su-30 MKI भी 7,500 से 9,000 लीटर प्रति घंटा तक खर्च कर सकता है. वहीं हल्के और सिंगल इंजन जेट जैसे Saab Gripen और भारत का LCA Tejas कम ईंधन खर्च करते हैं. इनकी खपत करीब 2,000 से 3,000 लीटर प्रति घंटा के बीच हो सकती है.
ईंधन खपत किन बातों पर निर्भर करती है?
फाइटर जेट कितना ईंधन खर्च करेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे: जेट की स्पीड, आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल, हथियारों और अतिरिक्त टैंक का वजन और उड़ान की ऊंचाई.
हवा में ईंधन भरना क्यों जरूरी है?
फाइटर जेट तेजी से ईंधन खर्च करते हैं, इसलिए लंबी दूरी के मिशन में हवा में ईंधन भरना जरूरी हो जाता है. टैंकर विमान की मदद से जेट उड़ान के दौरान ही ईंधन भर लेते हैं, जिससे वे बिना रुके कई घंटे तक ऑपरेशन कर सकते हैं. कुल मिलाकर, फाइटर जेट का माइलेज भले ही कम हो, लेकिन उनकी ताकत और गति ही उन्हें युद्ध का असली हथियार बनाती है.


