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‘भारत में चार किस्म के हिंदू हैं…’, मुंबई में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत, कहा- संघ का काम अनो
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‘भारत में चार किस्म के हिंदू हैं…’, मुंबई में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत, कहा- संघ का काम अनो

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक यानी RSS चीफ मोहन भागवत ने हिंदुओं के लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हम विश्व गुरु बनेंगे, लेकिन भाषण से नहीं. हमें उदाहरण पेश करना होगा. उन्होंने कहा कि अगर आप भारत के हो तो, ये स्वभाव आप में है. भारत का मुसलमान और ईसाई भारत का है. भारत में चार किस्म के हिंदू हैं. पहला वो जो कहते हैं, गर्व से कहो हम हिंदू हैं. दूसरा जो हम हिंदू हैं तो हैं, गर्व की क्या बात है. तीसरे वो जो कहते हैं, धीरे से बोलो हमें हिंदू हैं. घर में आकर पूछोगे तो बताएंगे. चौथा वो जो भूल गए हैं, जिनको भुला दिया गया है. और भी लोग भूल जाएं. ऐसा प्रयास चल रहा है. 

संघ का काम बेहद ही अनोखा है: मोहन भागवत

इसके अलावा उन्होंने कहा कि संघ का काम बेहद ही अनोखा है. पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. अब प्रत्यक्ष रूप से इसका अनुभव हो रहा है. हिंदू संज्ञा नहीं है. विशेषण है. भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं. यह सारी बातें मोहन भागवत ने RSS के 100 साल पूरे होने पर कही हैं. वह मुंबई के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे. जहां उन्होंने लोगों को संबोधित किया. 

संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ का कोई दूसरा काम नहीं

इस दौरान उन्होंने आगे कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. जिसको आप आरएसएस कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं, बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं. आरएसएस के प्रधानमंत्री हैं. उनकी एक पॉलिटिक्ल पार्टी है. वो बीजेपी है, जो अलग है. उसमें बहुत स्वयंसेवक हैं. प्रभावी भी हैं. आरएसएस का काम बिना किसी के विरोध किए है. संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वो बस अच्छे से हो जाएं. 

उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार की दो बातों को कभी नहीं छोड़ना. एक अपनी पढ़ाई में फर्स्ट आना, दूसरा देश के लिए जो कुछ चल रहा था, उसमें सक्रिय भाग लेना. ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे. उन्होंने कहा कि हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है. भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं. धर्मनिरपेक्षता गलत शब्द है. उसे पंथनिरपेक्षता कहना चाहिए क्योंकि धर्म जीवन का आधार है.



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