भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें देश से निर्वासित करने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार (2 फरवरी, 2026) को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश में अवैध रूप से घुसने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की पहचान करना और उन्हें वापस भेजना सरकार की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देश अपने-अपने हितों से चलते हैं, भारत को भी बिना किसी समझौते के अपने हितों के अनुसार अपनी राह तय करनी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होना चाहिए.
हैदराबाद में बोले सरसंघचालक मोहन भागवत
पीटीआई के मुताबिक, भागवत ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद की अपनी यात्रा के दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार (1 फरवरी, 2026) को आयोजित ‘संघ यात्रा के 100 वर्ष – नए क्षितिज’ विषय पर एक कार्यक्रम में शिरकत की और फिल्मी हस्तियों और वरिष्ठ नौकरशाहों से मुलाकात की.
इस दौरान देश में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की अवैध घुसपैठ के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उन्हें वापस भेजना सरकार की जिम्मेदारी है और नागरिक इसे अधिकारियों के संज्ञान में ला सकते हैं.
राष्ट्र के विकास में नागरिकों को भूमिका निभानी चाहिएः मोहन भागवत
भागवत ने कहा कि दुनिया में जारी उथल-पुथल के परिणामों का भारत पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यहां की पारिवारिक व्यवस्था, सोने की बचत और आर्थिक गतिविधियां परिवार-उन्मुख हैं. उन्होंने कहा, ‘RSS को समझने के लिए संघ का हिस्सा बनकर अनुभव प्राप्त करना चाहिए. अगर कोई RSS को सतही तौर पर समझता है, तो उसे गलत समझा जा सकता है. संघ इस बात पर जोर देता है कि राष्ट्र के विकास में नागरिकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, जबकि सरकारें, पार्टियां और नेता अपनी भूमिका निभाते हैं.’
उत्कृष्ट राष्ट्र-निर्माण के उद्देश्य के साथ निजी विकास संघ का सिद्धांतः भागवत
विज्ञप्ति में मोहन भागवत के हवाले से कहा गया, ‘संघ का सिद्धांत उत्कृष्ट राष्ट्र-निर्माण के उद्देश्य के साथ व्यक्तिगत विकास है.’ उन्होंने राष्ट्र की व्यापक प्रगति के लिए RSS की ओर से परिकल्पित पंच परिवर्तन के बारे में विस्तार से चर्चा की. भागवत ने इसके पांच घटकों – कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक जागरण), पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी.
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